खादी से बेहतर खाकी के शेर !

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अवाम की हिफाजत के लिये हिन्द की सरहद पर तैनात जल, थल, वायु सेना के जवान तो अपना उत्तरदायित्व बखूबी निभाते ही हैं परंतु देश के अंदर जनमानस की हिफाजत के लिये खाकी वर्दी में जांबाज शेर हमेशा चौकस रहते हैं वो खादी वालों से लाख बेहतर है !

साढ़े चार मीटर खाकी कपड़े से बनी हुई पोशाक जिसे वर्दी कहा जाता है वो उन जांबाज शेरों के लिये बनती है जिसे बदन पर धारण करने के बाद जुनून, ताकत और आत्मविश्वास खुद ब खुद जाग्रत हो जाता है ! हिन्द के अंदर रहने वाले अवाम की हिफाजत की जिम्मेदारी इन्ही शेरों पर होती है जिन्हें जनता “पुलिस" के नाम से जानती है !

गली के नुक्कड़ पर आवारा मित्र मण्डली के साथ बीड़ी का डंठल सुलगाने वाले राजनीति के गलियारों में धमाचौकड़ी मचाते हुए सत्ता के सिंहासन पर पहुंचकर बड़े बड़े मंचों से धर्म , जातपात, हिन्दू मुस्लिम, और मंदिर मस्जिद पर विवादित भाषण दे पाते हैं तो सिर्फ इसलिये कि इन खद्दर की लंगोटी वालों की सुरक्षा के लिये हर चौक चौराहे, बाजार, बंगला, गली नुक्कड़ हर मंच पर खाकी का शेर तैनात है और कानून व्यवस्था के साथ चंद चिंदी चोर राजनेताओं ने अपने सियासी फायदे के लिये इनके हाथ बांध रखे हैं ! अगर चौबीस घंटे के लिये इन खद्दर वालों की सुरक्षा हट जाए तो इनके अपने हमदर्द ही इन्हें ठोक देंगे ! हां ये बात सही है कि शेरों की जमात में कुछ गीदड़ भी शामिल होकर अपने आपको शेर समझने लगते हैं उन्हें भी शेर बनाया जा सकता है मगर सरकार ऐसा नहीं चाहती !!

खादी वाले अधिकतर नेता कहते हैं कि क्राइम कंट्रोल करो परंतु कभी कोई नेता नहीं कहता कि जुर्म को जड़ से खत्म कर दो क्यों कि जुर्म के पौधे को पेड़ से दरख्त बनाने वाले यही खद्दरदार होते हैं ! जिस दिन खाकी के जांबाज शेरों को जुर्म की जड़ खत्म करने के आदेश मिल गए ना उस दिन पहली फुर्सत में अधिकतर खद्दर वाले या तो सलाखों के पीछे होंगे या दो गज जमीन के नीचे खादी के कफन में लिपटे हुए । चंद चिंदी चोर नेता नामक जीव अपने काले कारनामों और गुनाहों को छिपाने के लिये खाकी के शेरों को बलि का बकरा बना देते हैं !!

हिन्द में आज जितने खाकी वाले शेर हैं वहीं शेरनियां भी कम नहीं हैं इन जांबाज शेर शेरनियों ने गुण्डे, बदमाश, मवाली, असामाजिक तत्वों के साथ चंद गद्दार नेताओं के पिछवाड़े में सुल्ला डालकर दिमाग की हिला रखी है !!

[नोट : इस पोस्ट में लिखी एक एक बात इसके मूल लेखक विवेक तिवारी जी के निजी विचार हैं ]
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